नमस्ते फ्रेंड्स, जब बात 'ब्याज पर ब्याज' लगने की आती है, तो हिसाब थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसलिए मैंने यह टूल बनाया है ताकि आप बिना दिमाग खपाए, तुरंत अपना चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंड इंटरेस्ट निकाल सकें।
फ्रेंड्स, चक्रवृद्धि ब्याज को आम भाषा में ब्याज पर ब्याज कहते हैं। इसका मतलब है कि पहले साल या महीने जो ब्याज बना, अगली बार उस ब्याज की रकम पर भी ब्याज लगेगा। निवेश करने वालों के लिए यह एक जादू की तरह है, लेकिन उधार लेने वालों के लिए यह बहुत भारी पड़ सकता है।
कुल राशि = मूलधन × (1 + दर ÷ 100) ^ समय
चक्रवृद्धि ब्याज = कुल राशि - मूलधन
मान लीजिए सुरेश ने बैंक में 1,00,000 रुपये 10% सालाना ब्याज दर पर 2 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी किए। यहाँ ब्याज पर ब्याज लगता है।
पहला साल: 1 लाख का 10% हुआ 10,000 रुपये। अब सुरेश के खाते में कुल 1,10,000 रुपये हो गए।
दूसरा साल: अब बैंक 1 लाख पर नहीं, बल्कि 1,10,000 रुपये पर 10% ब्याज देगा। जो कि 11,000 रुपये होगा।
तो 2 साल बाद सुरेश को कुल 21,000 रुपये का चक्रवृद्धि ब्याज मिलेगा। और उसकी कुल राशि 1,21,000 रुपये हो जाएगी। साधारण ब्याज होता तो सिर्फ 20,000 मिलता। यही चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत है!
ज़रूरी टिप:
गाँव में जब कोई कहता है कि वह ब्याज पर ब्याज लेगा, तो उसका मतलब होता है कि हर महीने के अंत में जो ब्याज बनेगा, अगले महीने वह भी मूलधन में जुड़ जाएगा। इसलिए गाँव का कंपाउंड इंटरेस्ट बहुत तेज़ी से बढ़ता है।
जब आपके मूलधन के साथ-साथ आपके द्वारा कमाए गए पिछले ब्याज पर भी दोबारा ब्याज लगाया जाता है, तो उसे चक्रवृद्धि ब्याज कहते हैं।
अगर आप कहीं पैसा निवेश यानी इन्वेस्ट कर रहे हैं, तो चक्रवृद्धि ब्याज बेहतर है क्योंकि इसमें आपका पैसा तेज़ी से बढ़ता है। लेकिन अगर आप लोन ले रहे हैं, तो साधारण ब्याज बेहतर है क्योंकि उसमें कम पैसा चुकाना पड़ता है.
भारत में लगभग सभी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर चक्रवृद्धि ब्याज देते हैं। कई बैंक इसे हर तिमाही यानी 3 महीने में जोड़ते हैं, जिससे रिटर्न और भी अच्छा मिलता है।
इसका फॉर्मूला है: कुल राशि = मूलधन × (1 + दर ÷ 100) ^ समय। फिर कुल राशि में से मूलधन घटाने पर चक्रवृद्धि ब्याज निकल आता है।
हाँ, बिल्कुल। अगर आपको गाँव का ब्याज निकालना है, तो बस दर का प्रकार में 'मासिक' चुनें और अपना दर डालें। यह टूल अपने आप महीने के हिसाब से कंपाउंडिंग कर देगा।